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    भारत का सर्वोच्च न्यायालय 11-12 अक्टूबर, 2025 को ‘बालिका की सुरक्षा: भारत में उसके लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण की दिशा में’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय वार्षिक हितधारक परामर्श का आयोजन करेगा।

    प्रकाशित तिथि: October 10, 2025
    National Annual Stakeholders Consultation

    भारत का सर्वोच्च न्यायालय

    10.10.2025

    प्रेस विज्ञप्ति

    भारत के सर्वोच्च न्यायालय की किशोर न्याय समिति 11-12 अक्टूबर, 2025 को ‘भारत में बालिका की सुरक्षा: उसके लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण की दिशा में’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय वार्षिक हितधारक परामर्श का आयोजन करेगी

                     

     भारत के सर्वोच्च न्यायालय की किशोर न्याय समिति 11-12 अक्टूबर, 2025 को 'बालिका की सुरक्षा: भारत में उसके लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण की दिशा में' विषय पर 10वीं राष्ट्रीय वार्षिक हितधारक परामर्श बैठक का आयोजन कर रही
     है। राष्ट्रीय परामर्श पूरे देश में आयोजित कई राज्य स्तरीय परामर्शों की परिणति का प्रतीक है। सर्वोच्च न्यायालय देश में प्रत्येक बच्चे के अधिकारों की रक्षा और उसे आगे बढ़ाने के लिए न्याय, सामाजिक कल्याण और सामुदायिक प्रणालियों के बीच मजबूत समन्वय को 
    बढ़ावा देने के उद्देश्य से सभी प्रमुख हितधारकों को एक साथ लाकर वार्षिक आधार पर राष्ट्रीय हितधारक परामर्श आयोजित करता रहा है।   
            

                           माननीय न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना (किशोर न्याय समिति की अध्यक्ष और भारत के सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश) और माननीय न्यायमूर्ति जे. बी. परदीवाला (किशोर न्याय समिति के सदस्य और भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश) के नेतृत्व में सर्वोच्च न्यायालय की किशोर न्याय समिति के तत्वावधान में आयोजित यह परामर्श सम्मेलन 11 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर हो रहा है। यूनिसेफ इंडिया के सहयोग से आयोजित यह राष्ट्रीय परामर्श सम्मेलन, प्रत्येक बालिका के सुरक्षित, स्वस्थ, शिक्षित और सशक्त विकास को सुनिश्चित करने के लिए भारत की सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।

                       भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश, माननीय न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई राष्ट्रीय परामर्श सम्मेलन में उद्घाटन भाषण देंगे। महिला एवं बाल विकास मंत्री, माननीय अन्नपूर्णा देवी; किशोर न्याय समिति की अध्यक्ष और भारत के सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश, माननीय न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना; और यूनिसेफ इंडिया की कंट्री रिप्रेजेंटेटिव, सुश्री सिंथिया मैककैफ्री भी उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगी। भारत के सर्वोच्च न्यायालय की किशोर न्याय समिति के सदस्य, माननीय न्यायमूर्ति जे. बी. परदीवाला द्वारा ‘बाल अधिकार और कानून पर एक पुस्तिका’ का विमोचन किया जाएगा।

                 दो दिनों तक चलने वाले इस परामर्श सत्र में लड़कियों के खिलाफ हिंसा को रोकने, पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने और शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक सुरक्षा तक पहुंच बढ़ाने के लिए मजबूत उपायों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। परामर्श सत्र का पहला सत्र जन्म लेने, पालन-पोषण और शिक्षा के अधिकार पर केंद्रित होगा, जिसके बाद दूसरा सत्र साइबर अपराधों से बालिका की सुरक्षा पर होगा। तीसरा सत्र बालिका को दुर्व्यवहार, शोषण और हिंसा से बचाने पर जोर देगा और इसमें बालिका तस्करी: रोकथाम, चुनौतियां और प्रभावी हस्तक्षेप; बाल विवाह और बालिका हिंसा के संबंध में राज्यों से सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना भी शामिल होगा। 12 अक्टूबर, 2025 को निर्धारित बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम, 2012 पर एक सत्र में चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी और बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम (पीओसीएसओ) के कार्यान्वयन को मजबूत करने के तरीकों का पता लगाया जाएगा, जिसके बाद समापन सत्र होगा जो परामर्श सत्र से प्राप्त सीख और आगे के रास्ते पर केंद्रित होगा।

                 किशोर न्याय समिति/पीओसीएसओ समिति के अध्यक्ष और उच्च न्यायालयों की किशोर न्याय समिति/पीओसीएसओ समिति के अन्य माननीय न्यायाधीश सदस्य दो दिवसीय परामर्श सत्र में भाग लेंगे। इस परामर्श सत्र में प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के महिला एवं बाल विकास/समाज कल्याण विभाग, स्वास्थ्य विभाग और विद्यालय शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। राज्य विधि सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव और महिला एवं बाल अपराधों से संबंधित मामलों के प्रभारी एडीजीपी अधिकारी सहित अन्य हितधारक भी परामर्श सत्र में भाग लेंगे। समापन सत्र में भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय के सचिव सक्रिय रूप से भाग लेंगे।

                   वर्ष 2024 में आयोजित वार्षिक हितधारक परामर्श में विकलांग बच्चों की सुरक्षा बढ़ाने पर चर्चा हुई, जिसके परिणामस्वरूप राज्य स्तर पर उचित व्यवस्था और आवासीय देखभाल सुविधाओं की बेहतर निगरानी जैसे कदम उठाए गए। वर्ष 2023 में, परामर्श का मुख्य उद्देश्य भारत के बाल-केंद्रित न्याय ढांचे के अनुरूप, कानून से संघर्ष कर रहे बच्चों के लिए सेवाओं में सुधार करना था।

                   न्यायपालिका, सरकार और नागरिक समाज की साझा प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए, इस वर्ष के परामर्श में इस बात पर जोर दिया गया है कि प्रत्येक लड़की की सुरक्षा और सशक्तिकरण एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है और भारत के समावेशी विकास की कुंजी है।

    पीडीएफ फाइल डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें

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    उद्घाटन सत्र देखने के लिए लिंक –

    https://youtube.com/live/Vxh9XjbmFb4?feature=share