प्रेस विज्ञप्ति दिनांक 11 अप्रैल, 2026
ई-समिति, भारत का सर्वोच्च न्यायालय
11.04.2026
प्रेस विज्ञप्ति
ई-समिति, भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने न्याय विभाग, भारत सरकार के सहयोग से दो दिवसीय न्यायिक प्रक्रिया पुनर्रचना एवं डिजिटल परिवर्तन पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया
दो दिवसीय न्यायिक प्रक्रिया पुनर्रचना एवं डिजिटल परिवर्तन पर राष्ट्रीय सम्मेलन: अतीत की समीक्षा, वर्तमान का पुनर्रचना और भविष्य का पुनर्परिभाषण के माध्यम से न्याय प्रणाली को सशक्त बनाना का आज उद्घाटन ई-समिति, भारत का सर्वोच्च न्यायालय तथा न्याय विभाग, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन माननीय श्री न्यायमूर्ति सूर्यकांत, भारत के मुख्य न्यायाधीश एवं ई-समिति, सर्वोच्च न्यायालय के संरक्षक-प्रमुख द्वारा किया गया। मुख्य न्यायाधीश ने इस बात पर बल दिया कि निष्पक्ष, समयबद्ध और प्रभावी न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करना मुख्य उद्देश्य है तथा प्रौद्योगिकी इस दिशा में समावेशन और न्यायिक प्रणाली की उत्तरदायित्व क्षमता को सुदृढ़ करने में एक महत्वपूर्ण साधन है।
माननीय श्री न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, ई-समिति के अध्यक्ष एवं सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने कहा कि सार्थक न्यायिक सुधार एवं प्रभावी न्याय वितरण के लिए प्रौद्योगिकी के साथ प्रक्रिया पुनर्रचना आवश्यक है।
श्री अर्जुन राम मेघवाल, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विधि एवं न्याय मंत्रालय, भारत सरकार ने कहा कि भारत उद्योग 4.0 के युग में प्रवेश कर चुका है और “सुधार, प्रदर्शन, परिवर्तन” के दृष्टिकोण के तहत प्रौद्योगिकी आधारित सुधार शासन एवं न्याय वितरण प्रणाली को नया रूप दे रहे हैं।
श्री जितिन प्रसाद, राज्य मंत्री, वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी, भारत सरकार ने कहा कि आधार, यूपीआई और डिजिलॉकर जैसी पहलों के माध्यम से तीव्र डिजिटल परिवर्तन समावेशी शासन को बढ़ावा दे रहा है तथा न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक कुशल बना रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार और न्यायपालिका के बीच प्रभावी सहयोग न्याय प्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
राष्ट्रीय सम्मेलन को दो दिनों में आयोजित पाँच कार्य सत्रों में विभाजित किया गया है, जिनमें प्रौद्योगिकी के एकीकरण और न्यायिक प्रक्रियाओं के पुनर्रचना के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है। पहले दिन तीन कार्य सत्र आयोजित किए गए, जिनमें विशेषज्ञों और हितधारकों द्वारा न्याय प्रणाली में प्रौद्योगिकी के उपयोग तथा न्यायिक प्रक्रियाओं के परिवर्तन पर विचार-विमर्श किया गया।
कार्य सत्र I, जिसकी अध्यक्षता माननीय श्री न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने की, में सिंगापुर के सर्वोच्च न्यायालय के उच्च न्यायालय (जनरल डिवीजन) के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एडन जू (परिवर्तन एवं नवाचार प्रभारी) ने समाधान-आधारित न्यायिक डिजिटलीकरण पर बल दिया। सिंगापुर के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने प्रक्रिया पुनर्रचना, ई-लिटिगेशन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों तथा हाइब्रिड न्यायालयों पर प्रकाश डाला और समावेशन, संस्थागत तैयारी तथा संतुलित तकनीकी एकीकरण की आवश्यकता बताई।
कार्य सत्र II, जिसकी अध्यक्षता माननीय श्री न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा ने की, में न्यायिक डिजिटल परिवर्तन और प्रक्रिया पुनर्रचना के प्रमुख पहलुओं पर चर्चा की गई। उन्होंने प्रौद्योगिकी के संतुलित और जागरूक उपयोग पर बल दिया।
माननीय श्री न्यायमूर्ति एम. सुंदर, मुख्य न्यायाधीश, मणिपुर उच्च न्यायालय ने डिजिटल अभिलेख संरक्षण और आपदा पुनर्प्राप्ति तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया।
माननीय श्री न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार, न्यायाधीश, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने जीएनएसएस आधारित भूमि सीमांकन की चर्चा की।
माननीय श्री न्यायमूर्ति बिभू दत्ता गुरु, न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने मलकाना प्रणाली के डिजिटलीकरण पर बल दिया।
कार्य सत्र III, जिसकी अध्यक्षता माननीय न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना ने की, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और आपराधिक न्याय सुधारों पर केंद्रित था।
माननीय न्यायमूर्ति आनंद सेन और माननीय न्यायमूर्ति निखिल एस. करियल ने डिजिटल साक्ष्य प्रबंधन पर चर्चा की, जबकि श्री गोविंद मोहन, गृह सचिव, भारत सरकार ने नए आपराधिक कानूनों के अंतर्गत तकनीकी एकीकरण पर प्रकाश डाला।
कार्य सत्र IV (12 अप्रैल) की अध्यक्षता माननीय न्यायमूर्ति राजेश बिंदल करेंगे। यह इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख और न्यायिक सुधारों पर केंद्रित होगा।
माननीय न्यायमूर्ति ए. मुहम्मद मुस्ताक, मुख्य न्यायाधीश, सिक्किम उच्च न्यायालय न्यायिक प्रक्रिया के सतत पुनर्रचना और इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख प्रबंधन पर बल देंगे।
कार्य सत्र V (12 अप्रैल) की अध्यक्षता माननीय न्यायमूर्ति संदीप मेहता करेंगे। यह डिजिटल न्यायालय प्रक्रियाओं पर केंद्रित होगा।
माननीय न्यायमूर्ति पी. के. कौरव ई-निरीक्षण ढांचे पर चर्चा करेंगे तथा माननीय न्यायमूर्ति बी. एम. श्याम प्रसाद जमानत प्रबंधन अनुप्रयोग पर प्रकाश डालेंगे।
श्री नीरज वर्मा, सचिव, न्याय विभाग, भारत सरकार ई-कोर्ट्स चरण III की रूपरेखा प्रस्तुत करेंगे।
यह सम्मेलन न्यायाधीशों, नीति-निर्माताओं और हितधारकों को एक मंच प्रदान करता है, जहां वे प्रौद्योगिकी के माध्यम से न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक सुलभ, कुशल और पारदर्शी बनाने पर विचार-विमर्श कर सकें।