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    न्यायमूर्ति डीपी मदोन

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    मदोन, दीनशाह पिरोशा, बी.ए. (ऑनर्स), एलएलबी, (अधिवक्ता मू.प. ), का जन्म, 7 अप्रैल, 1921 को हुआ। इन्होंने इंपीरियल हाई स्कूल, बॉम्बे, सरदार दस्तूर नोशिरवान हाई स्कूल, पूना, एलफिंस्टन कॉलेज, बॉम्बे, गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, बॉम्बे में शिक्षा प्राप्त की। 21 नवंबर, 1944 को अधिवक्ता (अ.प.) और 2 नवंबर, 1945 को बॉम्बे हाई कोर्ट में अधिवक्ता (मू.प.) और 31 मई, 1952 को सर्वोच्च न्यायलय में अधिवक्ता के रूप में नियुक्त किए गए। ज्यादातर इन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट में मूल पक्ष की वकालत की। बॉम्बे उच्च न्यायालय के अपीलीय पक्ष और सर्वोच्च न्यायालय सहित भारत के अन्य न्यायालयों और विदेशी न्यायालयों, अर्थात् नैरोबी में पूर्वी अफ्रीका के अपील न्यायालय और अदन के सर्वोच्च न्यायालय में भी काम किए। अधिकतर सिविल और संवैधानिक मामलों और कुछ कराधान और आपराधिक मामलों में भी भाग लिया। ये 1952 से 1955 तक गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, बॉम्बे में कानून के अंशकालिक प्रोफेसर रहे। 25 सितंबर, 1967 को बॉम्बे उच्च न्यायालय में अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किए गए। 6.8.1969 को वहां स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किए गए। मई 1970 में भिवंडी और महाराष्ट्र राज्य के अन्य स्थानों में हुई सांप्रदायिक उपद्रव की जांच के लिए एक सदस्यीय आयोग के रूप में कार्य किया। 11.8.1982 को बॉम्बे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किये गए। 15.3.1983 को ये भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किये गये। 7.4.1986 को ये सेवानिवृत्त हुये।

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