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    न्यायमूर्ति दोराईस्वामी राजू

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    श्री न्यायमूर्ति दोरईस्वामी राजू, न्यायाधीश, भारत का सर्वोच्च न्यायालय – 02 जुलाई, 1939 को जन्म। मद्रास विश्वविद्यालय से 1959 में बैचलर ऑफ आर्ट्स की उपाधि और 1961 में बी.एल. की उपाधि प्राप्त की। 27 जुलाई, 1962 को एक अधिवक्ता के रूप में नामांकित हुये। शुरू से ही तत्कालीन सरकारी अधिवक्ताओं के चैंबर में काम किया और समय-समय पर उच्च न्यायालय में राज्य के महाधिवक्ता की सहायता की। 1975 से 1987 तक: नियमित, सिविल, रिट, परिवहन, कराधान और भू-धृति मामलों में मूल और अपीलीय पक्षों पर उच्च न्यायालय में मामलों का संचालन करने वाले अधिवक्ता के रूप में स्वतंत्र रूप से काम किया। विभिन्न सार्वजनिक संस्थानों और उपक्रमों के लिए स्थायी अधिवक्ता थे जैसे: (क) तमिलनाडु टेक्स्ट बुक सोसायटी; (ख) तमिलनाडु पर्यटन विकास निगम; (ग) आंध्र प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम; (घ) अरुलमिघु धनदायुथपनीस्वामी देवस्थानम, पलानी; (ङ) भारतीय खाद्य निगम; और (च) कन्याकुमारी, नीलगिरी और दक्षिण आरकोट जिलों के जिला सहकारी केंद्रीय बैंक। 21 अप्रैल, 1987 को मद्रास उच्च न्यायालय, द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया। 14 जून, 1990 को पदोन्नत किया गया और मद्रास उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। 17 नवंबर, 1995 को सलाहकार बोर्ड, ‘सी.ओ.ई.एफ.पी.ओ.एस.ए.’ का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। 11 दिसंबर, 1995 को ‘कालाबाजारी रोकथाम’ और आवश्यक वस्तु आपूर्ति अधिनियम के तहत सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष नियुक्त किए गए। 01 मई, 1998 को केंद्र शासित प्रदेश पांडिचेरी के कार्यकारी अध्यक्ष, कानूनी सेवा प्राधिकरण, (राज्य प्राधिकरण) के रूप में नियुक्त किया गया। 01 जुलाई, 1998 को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय, शिमला के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त और शपथ ली। 28 जनवरी, 2000 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त और शपथ ली। 01.07.2004 को सेवानिवृत्त हुये। वर्तमान पता: “कनक दुर्गा” 20 (पुराना नंबर 39), पुरम प्रकाश राव रोड, बालाजी नगर, रोयापेट्टा, चेन्नई-600 014, (तमिलनाडु) फ़ोन 28132825 और 28130780।

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