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    प्रेस विज्ञप्ति दिनांक 12 अप्रैल, 2026

    प्रकाशित तिथि: April 12, 2026

    ई-समिति, भारत का सर्वोच्च न्यायालय

    12.04.2026

    प्रेस विज्ञप्ति

    ई-समिति, भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने न्याय विभाग, भारत सरकार के सहयोग से दो दिवसीय न्यायिक प्रक्रिया पुनर्रचना एवं डिजिटल परिवर्तन पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया

    दो दिवसीय न्यायिक प्रक्रिया पुनर्रचना एवं डिजिटल परिवर्तन पर राष्ट्रीय सम्मेलन: अतीत की समीक्षा, वर्तमान का पुनर्रचना और भविष्य का पुनर्परिभाषण के माध्यम से न्याय प्रणाली को सशक्त बनाना आज ई-समिति, भारत का सर्वोच्च न्यायालय तथा न्याय विभाग, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होकर संपन्न हुआ।

    राष्ट्रीय सम्मेलन को दो दिनों में पाँच कार्य सत्रों में आयोजित किया गया, जिनमें प्रत्येक सत्र ने प्रौद्योगिकी के एकीकरण तथा न्यायिक प्रक्रियाओं के पुनर्रचना के महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार किया। पहले दिन तीन सत्र आयोजित किए गए, जिनमें विशेषज्ञों और हितधारकों ने न्याय वितरण प्रणाली में प्रौद्योगिकी के उपयोग और न्यायिक प्रक्रियाओं के रूपांतरण पर विचार-विमर्श किया।

    दूसरे दिन की शुरुआत कार्य सत्र IV से हुई। कार्य सत्र IV की अध्यक्षता माननीय श्री न्यायमूर्ति राजेश बिंदल, न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गई। माननीय न्यायमूर्ति बिंदल ने प्रौद्योगिकी की भूमिका को सहायक साधन के रूप में रेखांकित किया, न कि प्रतिस्थापन के रूप में। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल उपकरणों का उपयोग सहायक साधनों के रूप में किया जाना चाहिए और इन्हें न्यायिक विवेक पर हावी नहीं होने दिया जाना चाहिए। उन्होंने ओपन-सोर्स प्लेटफार्मों के उपयोग तथा डेटा गोपनीयता से जुड़े संभावित जोखिमों पर भी चिंता व्यक्त की।
    इस सत्र में माननीय श्री न्यायमूर्ति ए. मुहम्मद मुस्ताक, मुख्य न्यायाधीश, सिक्किम उच्च न्यायालय का संबोधन भी हुआ, जिसमें उन्होंने डिजिटल युग में न्यायिक प्रक्रिया पुनर्रचना की उभरती चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने न्यायिक सुधार के लिए परामर्शात्मक और समस्या-आधारित दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया तथा कहा कि तकनीकी अपनाने से पहले मूलभूत प्रणालीगत समस्याओं की पहचान आवश्यक है।

    कार्य सत्र V की अध्यक्षता माननीय श्री न्यायमूर्ति संदीप मेहता, न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गई। इस सत्र में विभिन्न उच्च न्यायालयों द्वारा अपनाए गए प्रमुख तकनीकी नवाचारों पर प्रकाश डाला गया।
    माननीय श्री न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कुमार कौरव, न्यायाधीश, दिल्ली उच्च न्यायालय ने ई-निरीक्षण नियमों पर चर्चा की, जो न्यायालय अभिलेखों तक सुरक्षित और दूरस्थ पहुंच को सक्षम बनाते हैं।
    माननीय श्री न्यायमूर्ति बी. एम. श्याम प्रसाद, न्यायाधीश, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने जमानत सत्यापन प्रबंधन अनुप्रयोग (Surety Scrutiny Management Application) पर प्रस्तुति दी, जिसमें इसकी प्रमुख विशेषताओं और लाभों को रेखांकित किया गया।
    श्री नीरज वर्मा, सचिव (न्याय), विधि एवं न्याय मंत्रालय, भारत सरकार ने ई-कोर्ट्स चरण III परियोजना की उपलब्धियों और चुनौतियों की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा समावेशी, कागजरहित और प्रौद्योगिकी-आधारित न्याय प्रणाली की दिशा में प्रगति पर बल दिया।

    सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीशों तथा विभिन्न उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों एवं न्यायाधीशों ने राष्ट्रीय सम्मेलन की शोभा बढ़ाई। सम्मेलन में विभिन्न उच्च न्यायालयों के केंद्रीय परियोजना समन्वयकों एवं आईटी समितियों के सदस्यों ने व्यापक भागीदारी की। न्याय विभाग, गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के प्रतिनिधि, रजिस्ट्रार जनरल/रजिस्ट्रार/ओएसडी तथा अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जिला न्यायाधीशों ने भी सक्रिय भागीदारी की।

    माननीय श्री न्यायमूर्ति जे. के. महेश्वरी, न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय ने समापन भाषण दिया, जिसमें उन्होंने न्यायिक सुधारों और प्रौद्योगिकी उन्नति के महत्व को रेखांकित किया। इस अवसर पर स्मृति चिन्ह प्रदान किए गए।
    माननीय श्री न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्रा, उपाध्यक्ष, ई-समिति, सर्वोच्च न्यायालय ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी गणमान्य व्यक्तियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों की चर्चाएँ अत्यंत समृद्ध और विचारोत्तेजक रही हैं, जिन्होंने न्यायिक प्रक्रियाओं के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रदान किए हैं।

    अपने समापन वक्तव्य में उन्होंने आशा व्यक्त की कि सम्मेलन के दौरान हुई चर्चाएँ केवल संवाद तक सीमित न रहकर ठोस सुधारों में परिवर्तित होंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये दो दिन न्यायपालिका में आवश्यक परिवर्तन के लिए उत्प्रेरक सिद्ध होंगे और न्याय की दक्षता, पहुंच एवं वितरण को सुदृढ़ करेंगे।

    कार्यक्रम के दौरान सम्मेलन कक्ष में विभिन्न उच्च न्यायालयों की तकनीकी पहलों का प्रदर्शन भी किया गया, जो नवाचार और दक्षता के प्रति न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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